भारतीय सेना (Indian Army) हमेशा से ही अपनी क्षमता और रणनीति को समय के साथ अपडेट करती रही है। बदलते दौर में जहां युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, वहीं तकनीक (technology) की अहमियत भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इसी कड़ी में अब सेना ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सभी का ध्यान खींचा है। सेना का लक्ष्य है कि हर जवान के पास ऐसा साधन हो जिससे वह दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नज़र रख सके। यही कारण है कि अब चर्चा में आया है “उड़ता हुआ बाज” — यानी मिनी और माइक्रो ड्रोन ( mini micro drone) जो आने वाले वक्त में हर सैनिक के हाथ में एक नई ताकत बनकर सामने आने वाले हैं।
बदलता युद्ध का स्वरूप
आज के समय में युद्ध सिर्फ तोप और बंदूक तक सीमित नहीं रह गया है। अब युद्धक्षेत्र में जानकारी जुटाना, दुश्मन की हरकतों का पूर्वानुमान लगाना और मौके पर सटीक कार्रवाई करना सबसे ज्यादा मायने रखता है। पाकिस्तान और चीन ( pakistan and china) की ओर से सीमा पर लगातार बढ़ती चुनौतियों ने सेना को इस दिशा में गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर किया। कई बार ऐसे हालात बने जब जवानों को इलाके की वास्तविक जानकारी समय पर नहीं मिल पाई और ऑपरेशन में दिक्कतें आईं।
यही वजह है कि अब सेना ने ड्रोन तकनीक को सबसे निचले स्तर तक पहुँचाने का प्लान बनाया है। इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में हर जवान किसी न किसी रूप में ड्रोन का इस्तेमाल करना सीखेगा और उसे battlefield में deploy करेगा।
‘उड़ता हुआ बाज’ क्या है?
“उड़ता हुआ बाज” दरअसल सेना के लिए विकसित किए जा रहे मिनी और माइक्रो ड्रोन का नाम है। यह छोटे आकार के, बेहद हल्के और आसानी से ले जाए जा सकने वाले सिस्टम हैं जिन्हें सैनिक अपने साथ लेकर चल सकते हैं।
इन ड्रोन की खासियत यह होगी कि:
- ये हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरों से लैस होंगे।
- नाइट विज़न मोड की मदद से अंधेरे में भी दुश्मन की हरकतें पकड़ सकेंगे।
- रियल-टाइम वीडियो और तस्वीरें जवानों तक तुरंत पहुँचाएँगे।
- GPS और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खुद ही दिशा तय कर सकेंगे।
- दुश्मन की पोज़िशन, मूवमेंट और छिपने की जगह की सटीक जानकारी देंगे।
यानी, यह “उड़ता हुआ बाज” जवानों के लिए ऐसी आंख और कान का काम करेगा जो हवा में रहकर हर कोने-कोने की खबर लाता रहेगा।
सेना ने क्यों लिया यह फैसला?
भारतीय सेना ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े बदलाव देखे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर आर्मेनिया-अज़रबैजान संघर्ष तक, दुनिया भर ने देखा है कि छोटे ड्रोन कितने बड़े स्तर पर गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। कुछ हजार रुपये का ड्रोन करोड़ों की टैंक और आर्टिलरी को बेकार कर देता है।
सेना का मानना है कि आने वाले वक्त में अगर जवानों को ऐसी तकनीक नहीं दी गई तो युद्धक्षेत्र में भारी नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि अब बड़े स्तर पर ट्रेनिंग हब बनाए जा रहे हैं और भारतीय कंपनियों से हज़ारों मिनी और माइक्रो ड्रोन खरीदे जा रहे हैं।
जवानों को क्या मिलेगा फायदा?
- सीमा पर निगरानी आसान होगी – अब हर गश्त पर जाने वाला जवान अपने साथ ड्रोन ले जाएगा और पहले से इलाके को स्कैन कर सकेगा।
- आतंकी ठिकानों की पहचान – जंगलों या पहाड़ों में छिपे आतंकियों का पता लगाना आसान होगा।
- जवानों की जान की हिफाज़त – दुश्मन की घात में फँसने से पहले ड्रोन खतरे का अलर्ट दे देगा।
- ऑपरेशन और भी स्मार्ट होंगे – GPS और AI तकनीक के साथ जवान तेज़ी से फैसला ले पाएंगे।
- रियल-टाइम कम्युनिकेशन – जो तस्वीरें और वीडियो ड्रोन भेजेगा, उन्हें कमांड सेंटर तक तुरंत पहुँचाया जाएगा।
ट्रेनिंग पर भी जोर
सेना ने साफ किया है कि ड्रोन सिर्फ़ बांट देने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए अलग से ड्रोन ट्रेनिंग हब बनाए जा रहे हैं। यहां जवानों को बेसिक से लेकर एडवांस लेवल तक सिखाया जाएगा कि ड्रोन को कैसे उड़ाया जाए, कैसे surveillance मिशन किए जाएं और कैसे counter-drone हमलों से निपटा जाए।
इंडिजिनस कंपनियों को बढ़ावा
इस पूरी योजना का एक और बड़ा पहलू है Make in India। सेना ने घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता दी है। IdeaForge जैसी कंपनियों को पहले ही बड़े कॉन्ट्रैक्ट दिए जा चुके हैं। इसका फायदा यह होगा कि न सिर्फ सेना को आधुनिक तकनीक मिलेगी बल्कि देश के defense sector को भी मजबूती मिलेगी।
चुनौतियाँ भी हैं
हालांकि यह योजना जितनी महत्वाकांक्षी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।
- हर जवान तक ड्रोन पहुँचाने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण ज़रूरी है।
- इन डिवाइस की बैटरी और टेक्निकल मेंटेनेंस भी बड़ा सवाल है।
- Counter-drone technology पर भी बराबर ध्यान देना होगा, क्योंकि दुश्मन भी ऐसे ही हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है।

निष्कर्ष
“उड़ता हुआ बाज” सिर्फ एक ड्रोन नहीं बल्कि भारतीय सेना की नई सोच और रणनीति का प्रतीक है। यह योजना दर्शाती है कि सेना अब भविष्य के युद्ध को समझ रही है और जवानों को उसी स्तर पर तैयार कर रही है। आने वाले सालों में जब हर जवान अपने हाथ में ऐसा ड्रोन लेकर चलेगा तो यह देश की सीमाओं को और भी मज़बूत करेगा।
युद्ध अब सिर्फ हथियारों की ताकत का खेल नहीं, बल्कि तकनीक और सूचना की रफ्तार का खेल बन चुका है। और इस रेस में भारतीय सेना पीछे नहीं रहना चाहती।

