जम्मू-कश्मीर ( jammu kashmir ) की राजनीति (politics) एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार को पूरे पाँच साल का जनादेश दिया है, ऐसे में केवल दस महीनों में ही सत्ता छोड़ देने की बातें करना लोकतंत्र के साथ अन्याय होगा। चौधरी का यह बयान उस समय आया है जब प्रदेश में विपक्ष लगातार सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों के आरोपों से घिरा है।

जनादेश बनाम राजनीतिक दबाव

चौधरी ने साफ कहा कि जनता ने भरोसा करके उन्हें चुना है और लोकतंत्र का तकाज़ा है कि सरकार अपनी पूरी अवधि तक काम करे। उनका कहना है कि अगर हर कुछ महीनों में सरकार गिराने या इस्तीफा दिलाने की कोशिश होगी तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को कमजोर करेगा।
उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा चाहती है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार समय से पहले हट जाए, ताकि प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़े और उसका फायदा उन्हें मिले।

“दो सरकारें चल रही हैं”

अपने बयान में डिप्टी सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में इस समय दो तरह की सरकारें चल रही हैं।

  1. निर्वाचित सरकार, जिसे जनता ने चुना है।
  2. उपराज्यपाल की सरकार, जो केंद्र द्वारा संचालित है।

उनका कहना है कि संविधान और प्रशासन की डोर एक-दूसरे से टकरा रही है, जिससे जनहित के काम प्रभावित हो रहे हैं। चौधरी ने यह भी माना कि मौजूदा हालात में उनकी सरकार के पास सीमित शक्तियाँ हैं, लेकिन इसके बावजूद वे जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में जुटे हुए हैं।

सत्ता संघर्ष और विपक्ष की भूमिका

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि चौधरी का यह बयान सीधे-सीधे विपक्ष के दबाव का जवाब है। हाल के महीनों में बीजेपी और कुछ अन्य दलों ने यह तर्क दिया था कि मौजूदा सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है और उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है।
लेकिन चौधरी का तर्क है कि अगर सरकार को जनता ने चुना है, तो केवल दस महीने बीतने के बाद ही इस्तीफे की मांग करना न सिर्फ जल्दबाजी है बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना के भी खिलाफ है।

जनता की उम्मीदें और सरकार की चुनौतियाँ

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे हमेशा से अहम रहे हैं। मौजूदा सरकार को भी इन्हीं मोर्चों पर अपनी साख बनानी है। चौधरी ने कहा कि सीमित संसाधनों और केंद्र-राज्य टकराव के बावजूद उनकी सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश कर रही है।
उनका दावा है कि विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है और शिक्षा, स्वास्थ्य व आधारभूत ढाँचे में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

विपक्ष को करारा जवाब

बीजेपी अक्सर यह आरोप लगाती रही है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार जनता को ठोस नीतियाँ नहीं दे पा रही है और प्रशासनिक स्तर पर भी असफल रही है। लेकिन चौधरी का कहना है कि विपक्ष को चाहिए कि वह constructive politics करे, न कि जनता को गुमराह करने वाली बयानबाज़ी।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जनता ने पाँच साल का समय दिया है तो फिर बीच में सरकार बदलने का नैतिक या संवैधानिक आधार क्या है?

क्या है असली मुद्दा?

विश्लेषकों के मुताबिक, मौजूदा टकराव का असली कारण सिर्फ सत्ता का खेल है। बीजेपी यह चाहती है कि प्रदेश में जल्द से जल्द ऐसी स्थिति बने जिसमें उसे राजनीतिक लाभ मिले। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी सत्ता को बचाए रखने और अपने एजेंडे को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डिप्टी सीएम का बयान इसी राजनीतिक रस्साकशी की प्रतिक्रिया है, ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि उनकी सरकार मजबूती से खड़ी है और किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है।

आगे की राह

जम्मू-कश्मीर की राजनीति हमेशा से अस्थिरताओं और नए समीकरणों से भरी रही है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चौधरी और उनकी सरकार विपक्ष के दबाव को कैसे संभालते हैं।
लेकिन इतना तय है कि जनता के बीच यह बहस तेज़ हो चुकी है कि क्या सरकार को पाँच साल तक काम करने दिया जाना चाहिए या फिर विपक्ष की मांग के मुताबिक उसे समय से पहले हटना चाहिए।

निष्कर्ष

डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी का बयान साफ संकेत देता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार अपने कार्यकाल को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका “5 साल का जनादेश” वाला तर्क लोकतंत्र की मजबूती की ओर इशारा करता है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की असफलताओं से जोड़ रहा है।
फिलहाल, यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी से कहीं आगे निकल चुका है। यह प्रदेश की स्थिरता, जनता के विश्वास और लोकतंत्र की बुनियादी संरचना से जुड़ा सवाल बन गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *