भोपाल/गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले से उठे एक चर्चित हिरासत मौत मामले ने पूरे प्रदेश की पुलिस और जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। करीब एक साल पहले हुई इस घटना में अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई (CBI) ने दबाव बढ़ा दिया है। खास बात यह है कि इस मामले में आरोपित दो पुलिसकर्मी अभी तक गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी तलाश के लिए सीबीआई ने न सिर्फ अभियान तेज कर दिया है, बल्कि उन पर 2-2 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया है।
घटना की पृष्ठभूमि
यह मामला जुलाई 2024 का है। गुना जिले के मायना थाना क्षेत्र में रहने वाले 26 वर्षीय देवा पारदी की शादी तय थी। बताया जाता है कि शादी से ठीक एक दिन पहले पुलिस ने उसे संदिग्ध मामलों में पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। परिवार का आरोप है कि पुलिस थाने में देवा को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया और कुछ ही घंटों में उसकी हालत बिगड़ गई। बाद में उसकी मौत हो गई।
यह खबर जंगल में आग की तरह फैली और मामला सीधे हिरासत में मौत (custodial death) के रूप में सामने आया। चूंकि इसमें पुलिस थाने के अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, लोगों का गुस्सा भड़क उठा। प्रदेश भर में मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और जांच की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
यह मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। कोर्ट ने सीबीआई से बार-बार सवाल पूछा कि आखिर इतने महीनों बाद भी आरोपी पुलिस अधिकारी गिरफ्त में क्यों नहीं आए? कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर आम नागरिक पर आरोप होते तो अब तक पुलिस उसके घर का ताला तोड़कर अंदर घुस जाती, लेकिन जब मामला पुलिसकर्मियों का है तो कार्रवाई इतनी ढीली क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट की यह फटकार सीबीआई के लिए सीधी चुनौती बन गई। अदालत ने साफ कहा कि जांच एजेंसी को “लापरवाही” की छवि से बाहर निकलना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय हो।
CBI का दबाव और इनाम की घोषणा
इसी पृष्ठभूमि में सीबीआई ने फरार आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू किया है। फरार पुलिसकर्मियों के नाम हैं –
- संजीत सिंह मावई (TI, मायना थाना)
- उत्तम सिंह कुशवाहा (ASI)
दोनों पर गंभीर आरोप हैं कि इन्होंने हिरासत में मौजूद देवा पारदी के साथ मारपीट और प्रताड़ना की थी। उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी हो चुके हैं, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
सीबीआई ने हाल ही में घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति इन दोनों फरार पुलिसकर्मियों के बारे में पुख्ता जानकारी देगा, उसे ₹2-2 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। यह कदम साफ संकेत है कि एजेंसी अब कड़े दबाव में है और किसी भी हाल में इन पुलिसवालों को पकड़ना चाहती है।
प्रदेश की छवि पर असर
मध्यप्रदेश में हिरासत में मौतों के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन यह केस इसलिए खास है क्योंकि इसमें सीधे थाने के जिम्मेदार अधिकारी ही आरोपी बनाए गए हैं और महीनों बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासन की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि जब पुलिस के ही लोग फरार घूम रहे हों और उन्हें पकड़ने में इतनी देरी हो, तो आम आदमी को न्याय की उम्मीद कैसे होगी? वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि मामला सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई के हाथ में है, इसलिए निष्पक्ष जांच हर हाल में होगी।
परिवार की व्यथा
देवा पारदी के परिवार की पीड़ा भी सामने आ रही है। परिवार का कहना है कि वे पिछले एक साल से इंसाफ के लिए भटक रहे हैं। शादी की खुशियों के ठीक पहले घर में मातम छा गया और अब तक दोषियों को सजा नहीं मिल सकी। परिवार का यह भी आरोप है कि शुरुआत में स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश हुई, लेकिन जब मामला बड़ा बना तब जाकर जांच सीबीआई को सौंपी गई।
आगे की राह
सीबीआई की ओर से इनाम की घोषणा के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दबाव और बढ़ेगा। सूत्र बताते हैं कि एजेंसी ने कई संभावित ठिकानों पर निगरानी तेज कर दी है और पुलिस महकमे के अंदरूनी नेटवर्क से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
हालांकि एक बड़ा सवाल अब भी कायम है – क्या वाकई आरोपी पुलिसकर्मी इतनी आसानी से पकड़ में आ जाएंगे, या फिर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण उन्हें बचाता रहेगा? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को देखते हुए ऐसा लगता है कि अब बच निकलना मुश्किल होगा।

निष्कर्ष
गुना की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम का आईना भी है जहां पुलिस और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी और सीबीआई की सक्रियता से पीड़ित परिवार को उम्मीद जगी है कि आखिरकार न्याय मिलेगा। लेकिन जब तक आरोपी पुलिसकर्मी गिरफ्त में नहीं आते, तब तक यह मामला अधूरा ही माना जाएगा।

