Quick Highlights

  • सीहोर जिले में शिवराज सिंह चौहान का काफिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रोका
  • किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेसियों ने किया विरोध
  • शिवराज बोले – “हम तो मामा हैं यार, जहां कहते हैं रुकते हैं, सबकी सुनते हैं”
  • मौके पर मौजूद भीड़ में माहौल हल्का-फुल्का हो गया

पूरी खबर

मध्यप्रदेश के सीहोर(sehore) जिले के बिलकिसगंज इलाके में सोमवार को उस समय अनोखा नजारा देखने को मिला जब केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान( shivraj singh chauhan) का काफिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रोक लिया। विरोध करने वालों में कई स्थानीय कांग्रेसी नेता और किसान (farmers) शामिल थे, जो अपनी पुरानी मांगों को लेकर “मामा” से बात करना चाहते थे।

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घटना के दौरान माहौल थोड़ा तनावपूर्ण था, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के हल्के-फुल्के अंदाज़ ने पूरे माहौल को शांत कर दिया। जैसे ही उन्होंने कहा — “अरे हम तो मामा हैं यार, जहां कहते हैं रुकते हैं, सबकी सुनते हैं” — भीड़ में मौजूद कई कांग्रेस कार्यकर्ता भी हँसी नहीं रोक पाए। कुछ देर पहले तक नारेबाजी कर रहे लोग अब हंसते हुए अपनी समस्याएं बताने लगे।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि जिले के किसानों को पिछले साल हुई फसल खराबी का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। कई किसानों के बीमा क्लेम भी पेंडिंग हैं और बिजली के बिलों में गलतियां लगातार जारी हैं। इस पर शिवराज ने वहीं मौजूद अधिकारियों को बुलाकर कहा कि “जो भी शिकायतें हैं, तुरंत सूची बनाओ और हर मामले पर एक्शन लो।”

इस बीच कुछ युवाओं ने बेरोजगारी और किसानों को मिलने वाले समर्थन मूल्य को लेकर सवाल उठाए। शिवराज ने कहा, “जो भी योजनाएं हैं, उनका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, यही हमारा लक्ष्य है। अगर कहीं गड़बड़ी है, तो तुरंत बताओ, मैं खुद सुनूंगा।”

सीहोर जिले में शिवराज सिंह चौहान का यह दौरा कृषि विभाग की योजनाओं की समीक्षा के लिए था, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते यह कार्यक्रम चर्चा में आ गया। बाद में उन्होंने मीडिया से कहा, “लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का हक है। मैं खुद कई बार बिना सुरक्षा के जनता से मिलने निकल जाता हूं। किसान हमारे परिवार का हिस्सा हैं, इसलिए उनकी हर परेशानी मेरी अपनी है।”

मौके पर मौजूद स्थानीय प्रशासन ने बताया कि विरोध शांतिपूर्ण रहा और किसी तरह की झड़प नहीं हुई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे सरकार का ध्यान सिर्फ किसानों की बदहाल स्थिति की ओर खींचना चाहते थे, क्योंकि बीमा कंपनियों ने अब तक नुकसान की भरपाई नहीं की।

वहीं, भाजपा नेताओं ने कहा कि शिवराज का जनता से सीधा संवाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। “कांग्रेस भले ही विरोध करे, लेकिन मामा जहां जाते हैं, लोग सुनना चाहते हैं,” भाजपा के एक स्थानीय पदाधिकारी ने कहा।

इस पूरे घटनाक्रम में शिवराज सिंह चौहान की सहजता और विनम्रता एक बार फिर चर्चा में रही। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि मामा का यही ‘डाउन टू अर्थ’ अंदाज़ उन्हें लोगों के दिलों में जगह दिलाता है।


निष्कर्ष

सीहोर की यह घटना दिखाती है कि राजनीति में टकराव से ज्यादा संवाद की जरूरत है। विरोध के बीच भी अगर नेता जनता की बात सुन ले, तो कई मुद्दे वहीं खत्म हो जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने विरोध को भी मौके में बदल दिया और किसानों से सीधा संवाद कर यह दिखाया कि “मामा” अब भी सबकी सुनते हैं।

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