इंदौर ( indore ) नगर निगम में मानो घोटालों का कोई वार्षिक पैकेज चलता हो। नया मामला सामने आया है जहाँ करीब 9000 संपत्ति कर खातों में संशोधन करते हुए ऐसा खेल कर दिया गया कि सुनकर ही माथा घूम जाए।
शिकायत मिलने पर निगम आयुक्त दिलीपकुमार यादव ने तुरंत रेंडम जांच करवाई, और जैसा अंदेशा था—शिकायत पूरी तरह सही निकली। अब पूरे प्रकरण की हाई-लेवल जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है।
निगम में बैठे ‘जादूगर’: हर काम में निकाल लेते हैं कमाई का रास्ता
नगर निगम के अंदर ऐसे-ऐसे उस्ताद बैठे हैं जिन्हें किसी भी काम में कमाई का कोना ढूंढने में ज़रा भी वक्त नहीं लगता। काम सरकारी हो या जनता से जुड़ा—जनाब का ध्यान बस इस बात पर रहता है कि ‘अपना फायदा’ कहाँ से निकल सकता है।
इसी बीच आयुक्त को सूचना मिली कि संपत्ति कर खातों में बिल्डअप एरिया बढ़ाने के नाम पर भी जमकर गड़बड़झाला किया जा रहा है। पहली नज़र में लगा—अरे भाई, जब टैक्स देने योग्य एरिया बढ़ रहा है तो घोटाला कैसे? लेकिन मामला इससे कहीं ज्यादा चालाक निकला।
1 अप्रैल 2025 से अब तक 9000 खाते संशोधित—और सबमें गड़बड़ी!
जांच में पता चला कि बिल कलेक्टर और कैशियर ने पिछले कुछ महीनों में 9000 संपत्ति कर खातों में संशोधन दर्ज किया। इन सभी में बिल्डअप एरिया बढ़ाया गया था।
आयुक्त ने रेंडम जांच कराई—और यहीं से खुला खेल खलनायक वाला!
उदाहरण के तौर पर:
- असल में किसी प्लॉट पर 2 मंजिल का मकान बना है, यानी कुल 2000 वर्गफुट
- लेकिन मालिक टैक्स सिर्फ 1000 वर्गफुट पर दे रहा था
- बाद में संशोधन के नाम पर उसने 1300 वर्गफुट दिखाकर टैक्स बढ़ाने का ‘नाटक’ किया
- निगम कर्मचारियों ने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया
- जबकि हकीकत ये थी कि बिल्डअप एरिया 2000 वर्गफुट था
यानी जनता और सरकार दोनों का नुकसान, और पर्सनल फायदा—वाह निगम, वाह!
अब 9000 संपत्तियों की दोबारा जांच होगी
मामला पकड़े जाने के बाद आयुक्त ने सभी 9000 खातों की फिर से गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जांच कमेटी में शामिल हैं:
- अपर आयुक्त (राजस्व) शृंगार श्रीवास्तव
- विभाग अधीक्षक प्रदीप जैन
- सहायक राजस्व अधिकारी मोमिन खान
कमेटी को निर्देश दिया गया है कि देरी बिल्कुल न करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
बिल कलेक्टर और कैशियर से संशोधन के अधिकार छीने जाएंगे
इस घोटाले के बाद निगम प्रशासन बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। अब संपत्ति कर के खातों में संशोधन करने का अधिकार बिल कलेक्टर और कैशियर से वापस लिया जाएगा।
इसके लिए ई-नगर पालिका सिस्टम में बदलाव करना होगा क्योंकि अभी दोनों के अलग-अलग लॉगिन और पासवर्ड बने हुए हैं। इन्हें लॉक करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। उम्मीद है कि सोमवार तक यह पत्र भोपाल भेज दिया जाएगा।

