🗞️ Quick Highlights
- इंदौर के स्कूल शिक्षा विभाग में 2.87 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया, जिससे प्रशासन को एक्शन लेना पड़ा।
- कलेक्टर शिवम वर्मा ने 5 कर्मचारियों को निलंबित किया है, जिन पर वित्तीय गड़बड़ियों और रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप हैं।
- बीओ कार्यालय में संदिग्ध लेन-देन और भुगतान नियमों का उल्लंघन सामने आया है, जिसके बाद जांच की निगाहें और तेज हो गईं।
🧠 360 विश्लेषण
भाई, सुनते ही ऐसा लगे जैसे स्कूल शिक्षा विभाग की चौखट पर पैसा बरस रहा हो… लेकिन बारिश घोटालों की थी, ज्ञान की नहीं। इंदौर में अब एक बार फिर स्कूल शिक्षा का नाम घोटाले के साथ जुड़ गया है, और यह मामला महज़ कुछ सुना-समझा गड़बड़ नहीं निकला — ₹2.87 करोड़ के गबन तक पहुंच गया।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए 5 विभागीय कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फंड के गलत उपयोग और रिकॉर्ड में हेराफेरी की। नामों में — दिनेs पवार, मेघना चार्ल्स, सिद्धार्थ जोशी, राहुल अहिरे और अतुल त्रिवेदी शामिल हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि यह घोटाला थोड़े दिनों का खेल नहीं लगता, बल्कि विभाग में लंबे समय से चल रही वित्तीय गड़बड़ियों का परिणाम है — इसीलिए इसे पहली ठोस कार्रवाई कहा जा रहा है।
और हां, एक और दिलचस्प बात:
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🎯 सबके सामने वही लोग सस्पेंड किए गए, जबकि वो अधिकारी जिनके ऊपर जवाबदेही थी, फिलहाल बच निकलने में सफल रहे — यानि कि तलवार सिर्फ नीचे वालों पर चली।
अब प्रशासन ने विवेकानंद हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल मनोज खोपकर को नया बीओ नियुक्त किया है ताकि विभाग की कार्यप्रणाली और वित्तीय अनुशासन में सुधार लाया जा सके।
लगता है जैसे इंदौर का स्कूल शिक्षा विभाग फंड मैनेजमेंट में इतने दिनों से ‘DIY project’ चला रहा था, और अब जैसे-तैसे लीक पकड़ी गई — लेकिन यह मामला अभी खतम नहीं है। आगे की जांच, संभावित FIR और असली रहोस तक कौन पहुंचता है — यह देखने लायक है।
📌 निष्कर्ष
👉 ₹2.87 करोड़ के घोटाले ने इंदौर के स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासन की नींद उड़ा दी।
👉 पांच कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन सवाल अभी भी बाकी है कि सबसे ऊपर कौन जिम्मेदार है?
👉 नया बीओ आने से विभाग में सुधार की उम्मीद है, लेकिन अब सबकी निगाहें आगे की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

