Quick Highlights

  • इंदौर में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालकों ने फूटी कोठी चौराहे पर प्रदर्शन किया
  • प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा के लिए तय किए जा रहे रूट के खिलाफ नाराजगी
  • चालकों का कहना – इससे उनकी कमाई और आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा
  • 10 हजार रुपये देकर पूरे शहर में चलाने का परमिट लेने का दावा

360 विश्लेषण

इंदौर में शुक्रवार को ई-रिक्शा चालकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। शहर के फूटी कोठी चौराहे पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक एकत्र हुए और प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा के लिए तय किए जा रहे नए रूट सिस्टम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान इलाके में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।

प्रदर्शन कर रहे चालकों का कहना है कि प्रशासन ने हाल ही में ई-रिक्शा संचालन के लिए अलग-अलग रूट तय करने की योजना बनाई है, जिससे उन्हें अब पूरे शहर में ई-रिक्शा चलाने की अनुमति नहीं रहेगी। चालकों का दावा है कि जब उन्होंने ई-रिक्शा खरीदे थे, तब उन्होंने करीब 10 हजार रुपये का शुल्क देकर पूरे इंदौर शहर में चलाने का परमिट लिया था, लेकिन अब रूट सीमित कर दिए जाने से उनकी रोज़ की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।

ई-रिक्शा चालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन का यह फैसला उनकी रोज़ी-रोटी पर कुठाराघात है। उनका कहना है कि सीमित रूट मिलने से सवारी कम मिलेगी, जबकि ई-रिक्शा की किस्त, बैटरी चार्जिंग, मरम्मत और घर का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर उन्हें केवल कुछ चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित कर दिया गया, तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा।

प्रदर्शन कर रहे चालकों ने यह भी कहा कि प्रशासन ने बिना उनकी सहमति और बिना वैकल्पिक व्यवस्था बताए यह फैसला लागू करने की तैयारी कर ली है, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई चालकों ने मांग की कि या तो पुराने परमिट के अनुसार उन्हें पूरे शहर में ई-रिक्शा चलाने दिया जाए, या फिर नए नियमों के तहत उन्हें मुआवजा और बेहतर व्यवस्था दी जाए।

इस दौरान चालकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे आगे भी आंदोलन तेज कर सकते हैं।

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निष्कर्ष

फूटी कोठी चौराहे पर हुआ यह प्रदर्शन साफ दिखाता है कि इंदौर में ई-रिक्शा रूट को लेकर प्रशासन और चालकों के बीच टकराव बढ़ रहा है। जहां प्रशासन ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए रूट तय कर रहा है, वहीं ई-रिक्शा चालक इसे अपनी आजीविका पर खतरा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बातचीत और समाधान निकलता है या आंदोलन और तेज होता है, यह देखना अहम होगा।

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