Quick Highlights

  • भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से एक और व्यक्ति की मौत
  • मृतक ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था
  • क्षेत्र में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है
  • हजारों लोग उल्टी-दस्त और संक्रमण से पीड़ित
  • हाईकोर्ट ने नगर निगम से जवाब तलब किया

360 विश्लेषण

स्वच्छता के मामले में देशभर में नंबर-1 माने जाने वाले इंदौर में भागीरथपुरा इलाका इन दिनों एक गंभीर मानवीय त्रासदी से गुजर रहा है। पीने के पानी में सीवेज मिलने से फैले संक्रमण ने अब एक और जान ले ली है, जिससे इलाके में मातम और डर का माहौल और गहरा हो गया है।

ताजा मामला 51 वर्षीय हेमंत गायकवाड़ की मौत से जुड़ा है। हेमंत, जो ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते थे, दूषित पानी पीने के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। 22 दिसंबर को उन्हें परदेशीपुरा स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। 7 जनवरी को तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें अरविंदो अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान बीती रात उनकी मौत हो गई।

हेमंत अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में चार बेटियां हैं, जिनमें से दो अभी नाबालिग हैं। अचानक हुई इस मौत ने परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से तोड़ दिया है।

सीवेज मिला पानी बना मौत की वजह

जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही पानी की पाइपलाइन में लीकेज था। इसी कारण पीने के पानी में सीवेज का गंदा पानी मिल गया, जिसे लंबे समय तक लोगों ने मजबूरी में इस्तेमाल किया। यही गंदा पानी संक्रमण की जड़ बना।

24 मौतें, लेकिन खतरा अब भी बरकरार

इस इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हालात अब भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं। हजारों लोग उल्टी, दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे हैं। कई मरीज अभी भी शहर के अलग-अलग अस्पतालों और आईसीयू में भर्ती हैं।

प्रशासन पर कोर्ट की सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम और प्रशासन से कड़े सवाल किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर पानी इतना जहरीला कैसे हो गया कि वह इंसाaनों की जान लेने लगा। यह टिप्पणी प्रशासन के दावों पर सीधा सवाल खड़ा करती है।

राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह मदद उनकी क्षति की भरपाई नहीं कर सकती।

इलाके में गुस्सा और भय

भागीरथपुरा के रहवासी प्रशासन से बेहद नाराज हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने महीनों पहले गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन नगर निगम ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके को डर और अनिश्चितता के साए में डाल दिया है।


निष्कर्ष

भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैलता संकट अब सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन चुका है। एक-एक कर बुझती जिंदगियां यह सवाल पूछ रही हैं कि अगर समय पर कार्रवाई होती, तो क्या 24 लोगों की जान बच सकती थी? अब सबकी नजर इस पर है कि जिम्मेदारी तय होती है या नहीं, और क्या हालात सच में सुधरते हैं या नहीं।

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