🔹 Quick Highlights
- इंदौर में दूषित पानी की समस्या पर सरकार ने आधिकारिक संज्ञान लिया
- भागीरथपुरा की पुरानी पाइपलाइनें AMRUT 2.0 योजना में शामिल
- नगर निगम ने चार पैकेज में पानी आपूर्ति परियोजनाओं की निविदा निकाली
- यह कदम सुरक्षित, भरोसेमंद और टिकाऊ जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए
- SOP जारी, कई लीकेज ठीक, टैंकी और ट्यूबवेल की सफाई भी हुई 🔧
🔹 360 विश्लेषण
इंदौर शहर में हुई दूषित पानी की घटना पर केंद्र व राज्य सरकार दोनों ने अब संज्ञान लेना शुरू कर दिया है। खासकर भागीरथपुरा इलाके में जहाँ पिछले कुछ समय में पानी की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब पाई गई थी और लोगों की तबियत भी बिगड़ी थी — उस मामले पर राज्यसभा में भी जवाब दिया गया।
राज्यसभा में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री टोखन साहू ने बताया कि इंदौर में जो पाइपलाइनें 1997 से मौजूद हैं, उनमें से कई क्षतिग्रस्त और पुरानी हो चुकी हैं। इन्हें पहचानकर अब AMRUT 2.0 (अमृत 2.0) योजना के तहत बदलने का निर्णय लिया गया है।
नगर निगम ने चार अलग-अलग पैकेज में पानी की आपूर्ति और नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए निविदाएँ (tenders) जारी की हैं, जिनमें से पहला पैकेज का काम शुरू हो चुका है। यह पैकेज मूल रूप से संपूर्ण वॉटर सप्लाई चेन को कवर करता है — जिसमें जल स्रोत का विकास, शोधन, ट्रांसपोर्ट, भंडारण और शहर में वितरण शामिल है।
मंत्री ने यह भी बताया कि पानी को दूषित होने से रोकने हेतु मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) जारी कर दी गई हैं, और लीकेज की पहचान व मरामत का काम भी चल रहा है। अब तक करीब 14,181 लीकेज की जांच हुई है, जिनमें से 12,634 लीकेज को ठीक कर दिया गया है। साथ ही ओवरहेड टैंकों की सफाई और ट्यूबवेल टेस्टिंग भी सुनिश्चित की जा रही है।
बता दें कि इंदौर की पुरानी पानी आपूर्ति लाइनें दशकों पुरानी हैं और पिछले कुछ महीनों में जल आपूर्ति प्रणाली के कारण कई जगह पानी की गुणवत्ता खराब होने की घटनाएँ सामने आई थीं, जिससे जनता के बीच चिंता महसूस की जा रही थी। ऐसे में AMRUT 2.0 के तहत पुराने नेटवर्क को बदलना एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
🔹 निष्कर्ष
कुल मिलाकर, इंदौर में दूषित पानी की समस्या ने सरकार के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अब पुरानी पाइपलाइनें AMRUT 2.0 के तहत बदली जा रही हैं और नई प्रणालियाँ बनाई जा रही हैं। इस कदम से उम्मीद है कि भविष्य में जल आपूर्ति अधिक भरोसेमंद, टिकाऊ और सुरक्षित बनेगी, जिससे शहरवासियों को गुणवत्तापूर्ण पानी मिल सके।

