🔴 Quick Highlights
- इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में दिनेश प्रजापत का गुस्सा हुआ था वायरल
- मां की पेंशन और SIR से नाम कटने को लेकर महीनों से परेशान थे
- वीडियो CM Mohan Yadav तक पहुंचा
- मुख्यमंत्री के निर्देश पर तुरंत कार्रवाई
- मां रामप्यारी बाई की पेंशन शुरू, इलाज और आर्थिक मदद भी मिली
🧠 360 विश्लेषण
इंदौर के रहने वाले दिनेश प्रजापत की कहानी कोई एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की तस्वीर है जहां गरीब की सुनवाई अक्सर तारीखों में दब जाती है। दिनेश मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। उनकी मां रामप्यारी बाई की पेंशन SIR प्रक्रिया में नाम कटने के बाद बंद हो गई थी। इसके बाद वह अपनी बुज़ुर्ग मां को लेकर बार-बार इंदौर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचते रहे, लेकिन हर बार समाधान की जगह अगली तारीख थमा दी जाती थी।
मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान दिनेश का सब्र जवाब दे गया। वह गुस्से में चीखते हुए बोले – “तुम काहे को कलेक्टर हो, गरीबों की सुनते नहीं हो।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। यह कोई स्क्रिप्टेड ड्रामा नहीं था, बल्कि उस मजबूरी की आवाज़ थी जिसमें एक मजदूर काम छोड़कर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था।
वीडियो वायरल होने के बाद मामला सीधे मुख्यमंत्री Mohan Yadav तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रशासन को संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। तत्काल KYC प्रक्रिया पूरी कर रामप्यारी बाई की पेंशन दोबारा शुरू कराई गई। इसके साथ ही उन्हें अरविंदो अस्पताल में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई। परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई, ताकि इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों में कोई दिक्कत न हो।
इतना ही नहीं, BLO के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी दिक्कत दोबारा न आए। प्रशासन की इस तेज़ कार्रवाई से परिवार को बड़ी राहत मिली है।
दिनेश प्रजापत ने बाद में एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब उनकी मां की पेंशन चालू हो चुकी है और इलाज की भी उचित व्यवस्था हो गई है। दिनेश का कहना था कि उनकी नाराजगी सिस्टम से थी, क्योंकि हर बार उन्हें सिर्फ इंतज़ार ही मिला।
असल परेशानी यही थी कि हर जनसुनवाई के दिन दिनेश को मजदूरी छोड़नी पड़ती थी, जिससे उनका रोज़ का नुकसान होता था। वायरल वीडियो में वह यह कहते भी दिखे थे कि “यहां आएंगे तो कमाएंगे कैसे?” यही सवाल इस पूरी व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ा होता है।
⚖️ निष्कर्ष
दिनेश प्रजापत की समस्या का समाधान होना राहत की बात है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अगर वीडियो वायरल न होता, तो शायद यह मामला यूं ही फाइलों में दबा रहता। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता सराहनीय है, पर सिस्टम को ऐसा होना चाहिए कि गरीब को सुने जाने के लिए चीखना न पड़े।
यह मामला प्रशासन के लिए एक सीख है कि जनसुनवाई सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भरोसे की आखिरी उम्मीद होती है।

