Quick Highlights
- इंदौर में ई-रिक्शा को 4 जोन में बांटा गया
- हर जोन के लिए अलग रंग: नीला, पीला, लाल और सफेद
- राजबाड़ा क्षेत्र अब पूरी तरह ई-रिक्शा मुक्त रहेगा
- 10 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
- ई-रिक्शा चालकों ने फैसले का विरोध शुरू किया
360 विश्लेषण
इंदौर शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने ई-रिक्शा संचालन में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत शहर को चार जोन में बांटा गया है और प्रत्येक जोन के लिए ई-रिक्शा का अलग रंग निर्धारित किया गया है। जोन-1 में नीले, जोन-2 में पीले, जोन-3 में लाल और जोन-4 में सफेद रंग के ई-रिक्शा चलेंगे।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्र राजबाड़ा पर पड़ा है, जहां अब ई-रिक्शा का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और यातायात सुचारू रूप से चलेगा।

हालांकि, इस नए नियम को लेकर ई-रिक्शा चालकों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कई चालकों का कहना है कि जोन सिस्टम लागू होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ेगा, क्योंकि वे अब पूरे शहर में स्वतंत्र रूप से सवारी नहीं ले पाएंगे। इसके चलते चालकों द्वारा लगातार विरोध भी किया जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हर ई-रिक्शा को अपने निर्धारित जोन में ही संचालन करना होगा। यदि कोई ई-रिक्शा दूसरे जोन में चलता पाया गया, तो उसके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कई अन्य नियम भी लागू किए गए हैं। ई-रिक्शा पीछे से खुले रहेंगे, नगर निगम इनके लिए अलग स्टॉप बनाएगा और सड़क किनारे निर्धारित मार्किंग के अंदर ही इन्हें रोका जा सकेगा।
सभी ई-रिक्शा चालकों को 10 दिनों के भीतर पंजीयन कराना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। तय समय सीमा के बाद बिना पंजीयन वाले ई-रिक्शा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जोन आवंटन “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के लिए ट्रैफिक थाना पश्चिम (महूनाका) और ट्रैफिक थाना पूर्व (एमटीएच कंपाउंड) को केंद्र बनाया गया है।
निष्कर्ष
इंदौर में लागू यह नई ई-रिक्शा व्यवस्था जहां एक ओर ट्रैफिक सुधारने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर चालकों के विरोध के चलते यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और चालक इस पर किस तरह संतुलन बनाते हैं।

