🔴 Quick Highlights
- 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लगेगा।
- ग्रहण का समय लगभग 3:20 बजे से 6:46 बजे तक (IST) रहेगा।
- भारत में चंद्रमा का उदय शाम के समय होगा, जिससे कई हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा।
- यह चंद्र ग्रहण ब्लड मून (लाल चांद) का रूप ले सकता है।
- ग्रहण का सूतक काल सुबह से शुरू होकर ग्रहण समाप्ति तक रहेगा।
🧠 360 विश्लेषण
चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा सीधी लाइन में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इससे चंद्रमा सीधे सूर्य की रोशनी नहीं पाता और वह कुछ समय के लिए गहरा लाल या तांबे जैसा रंग ले लेता है — जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को दोपहर 3:20 बजे (IST) के आसपास शुरू होगा और लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक चलेगा, शाम के करीब 6:46 बजे इसकी समाप्ति होगी।
भारत में यह ग्रहण पूरा दिखेगा या उसके अंतिम चरण को कई हिस्सों में देखा जा सकता है। चंद्रमा का उदय लगभग शाम 6:20 बजे के आसपास होगा और उस समय यह ग्रहण के अन्तिम पड़ाव में होगा।
इस साल का यह पहला चंद्र ग्रहण होली के दिन पड़ रहा है, जिससे लोगों में इसे लेकर खास उत्साह और धार्मिक मान्यताएँ भी जुड़ी हुई हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से, इस दौरान सूतक काल की अवधारणा भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसा माना जाता है कि चंद्र ग्रहण से पहले सुबह के समय से ही सूतक (अशुभ प्रभाव) शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होने तक रहता है, जिसके दौरान कुछ पूजा-पाठ या शुभ कर्मों से परहेज किया जाता है।
यह चंद्र ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से एक रोमांचक खगोलीय घटना है जिसमें चंद्रमा के अँधेरे और लाल दिखने का सुंदर दृश्य आकाश में दिखाई देगा। इसे देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती; साफ आसमान होने पर यह आँखों से भी देखा जा सकता है।
⚖️ निष्कर्ष
3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ खगोलीय आयोजन है जो इस बार होली के साथ जुड़ा हुआ है, और इसे भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा।
👉 ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग बदलता दिखाई देगा — ‘ब्लड मून’ का नजारा।
👉 सूतक काल और धार्मिक मान्यताओं के चलते कुछ परंपराएँ अपनाई जाती हैं।
👉 वैज्ञानिक रूप से यह एक सामान्य प्राकृतिक घटना है, पर इसके दृश्य और सांस्कृतिक महत्व दोनों बड़े हैं।

